शिक्षकों को समर्पित कविता

शिक्षक की गोद में उत्थान पलता है।
जहां सारा शिक्षक के पीछे चलता है।
शिक्षक का बोया पेड़ बनता है।
हजारों बीज वहीं पेड़ जनता है।
काल की गति को शिक्षक मोड़ सकता है।
शिक्षक धरा से अंबर को जोड़ सकता है।
शिक्षक की महिमा महान होती है।
शिक्षक बिन अधूरी वसुन्धरा रहती है।
याद रखो चाणक्य ने इतिहास बना डाला था।
क्रूर मगध राजा को मिट्टी में मिला डाला था।
बालक चंद्रगुप्त को चक्रवर्ती सम्राट बनाया था।
एक शिक्षक ने अपना लोहा मनवाया था।
संदीपनी से गुरु सदियों से होते आए हैं।
कृष्ण जैसे नन्हें-नन्हें बीज बोते आए हैं।
शिक्षक से ही अर्जुन और युधिष्ठिर जैसे नाम हैं।
शिक्षक की निंदा करने से दुर्योधन बदनाम है।
शिक्षक की ही दया दृष्टि से बालक राम बन जाते हैं।
शिक्षक की अनदेखी से वो रावण भी कहलाते हैं।
हम सब ने भी शिक्षक बनने का सुअवसर पाया है।
बहुत बड़ी जिम्मेदारी को हमने गले लगाया है।
आओ हम संकल्प करें कि अपना फर्ज निभाएंगे।
अपने प्यारे भारत को हम जगतगुरु बनाएंगे।
अपने शिक्षक होने का हरपल अभिमान करेंगे।
इस समाज में हम भी अपना शिक्षा दान करेंगे।

By:- Raj Laxman 

Comments

Popular posts from this blog

Subhash Chandra Bose Birth Anniversary.

"INTERNATIONAL YOGA DAY CELEBRATION" ON 21st JUNE 2023