" मां "

"जिन्होंने हमें लिखा.... उनके लिए हमने लिखा...."

कल....
कल जब उठकर काम पर जा रहा था 
तो अचानक लगा कि कोई रोक लगा मुझे...(2) 
और कहेगा खड़े-खड़े दूध मत पी हजम नहीं होगा
मुझे लगा कोई कहेगा खड़े-खड़े दूध मत पी हजम नहीं होगा..
दो घड़ी सांस ले लें 
और इतनी ठंड 
और कोट भूल गया
इसे भी अपने पास ले लें।
मन में सोचा मां रसोई से बोली होगी
जिसके हाथों में सना आटा होगा।
पलट के देखा तो क्या मालूम था कि वहां सिर्फ सन्नाटा होगा...(2) 
अरे अब हवाएं ही तो बात करती हैं मुझसे
ये अंतरिक्ष निर्वाहन ये वैक्यूम बात करते हैं
लगता है जब जाऊंगा किसी खास काम से 
तो कोई कहेगा दही शक्कर खा ले बेटा अच्छा शगुन होता है
कोई कहेगा गुड़ खा ले बेटा अच्छा शगुन होता है
पर मन इसी बात के लिए रोता है 
सब कुछ है मां सब कुछ 
जिस आजादी के लिए मैं तुझसे सारी उम्र लड़ता रहा
वो सारी आजादी मेरे पास है 
फिर भी न जाने क्यु दिल की हर धड़कन उदास है
कहता था ना तुझसे कि मैं वही करूंगा जो मेरे जी मे  आएगा
और आज मैं वही सब‌ कुछ करता हूं
जो मेरे जी में आता है 
बात यह नहीं है कि मुझे कोई रोकने वाला नहीं है 
बात है तो इतनी सी सुबह देर से उठु ना तो कोई टोकने वाला नहीं है...(2)
रात को लेट लौंटु तो कौन टोकेगा भला
दोस्तों के साथ घूमने पर‌ उलाहने कौन देगा
मेरे उन तमाम झूठे बहाने कौन देगा
कौन कहेगा कि इस उम्र में क्यों परेशान करता है
हाय राम ये लड़का क्यों नहीं सुधरता है
पैसे कहां खर्च हो जाते हैं तेरे क्यों नहीं बताता है 
सारा-सारा दिन मुझे सताता है
रात को देर से आता है 
खाना गर्म करने को भागती रहुं 
खिलाने को तेरे पीछे भागती रहुं
बहाती रहूं आंसू तेरे लिए
तूने कुछ सोचा है मेरे लिए
खैर मेरा तो क्या होना है क्या हुआ है 
तू खुश रह लेना यही दुआ है 
और आज तमाम खुशियां ही खुशियां..
गम यह नहीं है 
कि कोई यह सब खुशियां बांटने वाला होता..(2)
पर कोई तो होता जो गलतियों पर डांटने वाला होता...

कि तू होती ना तो हाथ फेरती सर पर
हल्के से बाम लगाती 
आवाज दे-देकर सुबह उठाती 
दिवाली पर टीका लगाकर रुपए देती 
और कहती बड़ों के पैर छूना आशीर्वाद मिलेगा..(2)
अगला कपड़ा अगली दिवाली को सिलेगा 
बहन को सताया तो दो चांटे मारती 
बीमार पड़ता तो रो-रोकर नजरें उतारती 
परीक्षा से आते ही खाना खिलाती
पापा की डांट का डर दिखाती
इसे नौकरी मिल जाए तरक्की करें दुआओं में हाथ उठाती
पर तरक्की के लिए घर छोड़ देगा 
वह सुनकर दरवाजे के पीछे चुपके चुपके आंसू बहाती
सब कुछ है मां सब कुछ आज तरक्की की हर रेखायें तेरे बेटे को छू कर जाती है
पर, मां सच में तेरी बहुत याद आती है.........।


Written by:- Raj Laxman

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